अशोक सिंहल की जन्मशती पर पीएम मोदी ने लिखा विशेष आलेख, साझा किए संस्मरण
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल की जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके जीवन, विचारों और सामाजिक योगदान पर एक विशेष आलेख लिखा है। प्रधानमंत्री ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आलेख का लिंक साझा करते हुए अशोक सिंहल से जुड़े अपने अनुभव भी बताए।
दृढ़ संकल्प और सेवा भावना को किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने अशोक सिंहल के व्यक्तित्व को दृढ़ संकल्प और सादगी का संगम बताया। उन्होंने लिखा कि संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, आध्यात्मिक आस्था और सामाजिक एकता के लिए समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
पीएम मोदी ने अपने आलेख की शुरुआत एक प्रसिद्ध सुभाषित से की, जिसमें परमार्थ और सेवा को जीवन का उद्देश्य बताया गया है। उन्होंने कहा कि अशोक सिंहल का जीवन भी दूसरों की सेवा और लोक कल्याण के लिए समर्पित रहने का उदाहरण था। उनके जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत 27 सितंबर से हुई है।
1981 के पत्र का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अपने युवा कार्यकर्ता के दिनों का एक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1981 में उन्हें अशोक सिंहल का हाथ से लिखा पत्र मिला था। इस पत्र में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम की जानकारी और जिम्मेदारियों का उल्लेख था।
उन्होंने बताया कि अशोक सिंहल दशकों तक लगातार संगठन के लिए काम करते रहे। उन्होंने देश के दूरदराज क्षेत्रों की यात्राएं कीं और गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में जाना उन्हें विशेष रूप से पसंद था। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी वे राहत और सेवा कार्यों में आगे रहते थे। वर्ष 2001 के कच्छ भूकंप के दौरान उनके साथ बिताया अनुभव भी पीएम मोदी ने याद किया।
परिवार से मिले संस्कार, सेवा की ओर बढ़े
प्रधानमंत्री ने बताया कि अशोक सिंहल का संबंध एक प्रतिष्ठित परिवार से था। उनके पिता महावीर जी प्रशासक थे, जबकि उनके एक भाई पुलिस अधिकारी और सांसद रहे तथा दूसरे भाई त्रिपुरा के मुख्य सचिव रहे।
इसके बावजूद अशोक सिंहल में बचपन से ही सेवा और करुणा की भावना दिखाई देती थी। प्रयागराज के संगम तट पर समय बिताना और साधु-संतों के साथ उनका आत्मीय संबंध उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इन अनुभवों ने उनकी सांस्कृतिक समझ को गहराई दी और उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़ने में भूमिका निभाई।
राम जन्मभूमि आंदोलन में रही प्रमुख भूमिका
पीएम मोदी ने अशोक सिंहल के संगठनात्मक कौशल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न संस्थाओं और आंदोलनों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रभावशाली वाणी और नेतृत्व क्षमता का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया।
राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंहल की भूमिका को याद करते हुए पीएम मोदी ने 1991 की बोट क्लब रैली के उनके संबोधन और उस दौर की कई घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के पीछे अशोक सिंहल जैसी विभूतियों का भी लंबे समय तक किया गया समर्पण रहा।
सामाजिक समानता और शिक्षा पर भी दिया जोर
प्रधानमंत्री के अनुसार अशोक सिंहल सामाजिक एकता और समानता के पक्षधर थे। अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने के लिए कामेश्वर चौपाल के चयन और काशी में डोम राजा के सम्मान का भी उन्होंने उल्लेख किया।
शिक्षा, विशेष रूप से वैदिक शिक्षा, और संगीत भी अशोक सिंहल की रुचि के प्रमुख क्षेत्र थे। वे एकल विद्यालय पहल से भी जुड़े रहे। प्रधानमंत्री ने उनके संगीत प्रेम को याद करते हुए 2015 में उनके 90वें जन्मदिन के अवसर पर गाए गए गीत का भी उल्लेख किया।
युवाओं को उनके जीवन से परिचित कराने की अपील
आलेख के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अशोक सिंहल ने अपना जीवन राष्ट्र के उत्कर्ष के लिए समर्पित किया। उन्होंने जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर अधिक से अधिक युवाओं को उनके जीवन, कार्यों और व्यक्तित्व से परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।